“191 फीट का ध्वज… और Ayodhya में फिर राजनीति की बिजली!”

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

अयोध्या की हवा मंगलवार को कुछ ज़्यादा ही आध्यात्मिक थी—कारण था श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर 191 फीट ऊंचा केसरिया धर्म ध्वज, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैदिक मंत्रों के साथ फहराया।
वैसे कहने को यह एक धार्मिक अनुष्ठान था, लेकिन माहौल देखकर ऐसा लग रहा था कि अयोध्या में कम, पूरे देश में सूक्ष्म कंपन हो रहा है।

PM Modi का ध्वजारोहण—“ध्वज देखोगे, पुण्य मिलेगा!”

मंदिर का शिखर 161 फीट और उसके ऊपर 30 फीट का ध्वज-दंड। उसके ऊपर जो ध्वज लहराया—वो सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि पूरी रामायण, सूर्यवंश परंपरा और अयोध्या का इतिहास लिए हुए।

PM Modi ने कहा कि— “जो लोग मंदिर नहीं आ सकते, वो दूर से ध्वज के दर्शन कर लें, वही पुण्य मिलेगा।”

एक तरह से ध्वज को Spiritual Wi-Fi Router की उपमा समझ लीजिए—कनेक्शन सब तक पहुंचेगा।

Iqbal Ansari की प्रतिक्रिया—“अयोध्या देवताओं की नगरी है”

बाबरी मस्जिद केस के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने पूरे कार्यक्रम को “बहुत शुभ और सौहार्दपूर्ण” बताया। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों को बुलाया गया, और वो भी शामिल हुए।

यह बयान कई लोगों को ऐसे लगा जैसे अयोध्या में धर्म और राजनीति की टक्कर नहीं, बल्कि तालमेल की नई स्क्रिप्ट लिखी जा रही है।

तैयारी ऐसी कि Netflix की प्रीमियर भी शर्मा जाए

अयोध्या पिछले कई दिनों से दुल्हन की तरह सज-धज कर तैयार थी। रोड शो, फूल, रोशनी, सुरक्षा—सब किसी बड़े त्योहार जैसे। PM मोदी शहर में रोडशो करते हुए मंदिर परिसर पहुंचे और अभिजीत मुहूर्त में ध्वजारोहण किया।

ध्वज का डिज़ाइन—इतिहास की एम्ब्रॉयडरी

इस ध्वज पर सूर्य का चिह्न उसके मध्य में और कोविदार वृक्ष अंकित है।

गुजरात के अहमदाबाद से लाई गई यह ध्वजा कारीगरी दिखाती है कि आस्था और कला का कॉम्बो क्या कमाल कर सकता है।

लेकिन… राजनीति कहां गई? यहाँ है!

ध्वजारोहण जैसा आध्यात्मिक कार्यक्रम भी भारतीय राजनीति की पकड़ से बच नहीं पाता। अयोध्या में हल्का-सा सवाल गूंजा—कौन बुलाया गया, किसे नहीं बुलाया गया? लेकिन इस बार मुख्य सुर धार्मिक सौहार्द का रहा।

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